Sunday, July 19, 2009

फिज़ा


इक सुकून भरा ये मंजर ,ये आवारगी फिज़ा की ,
कर देगी ये दीवाना ,गर ज़िद पे अपनी आए !


हवा का ठंडा झोंका ,शबनम की प्यारी बुँदे,
ये हमसे कह रहीं हैं ,कि दिल तेरा चुराएँ!


ये मदहोशियों का मौसम, ये तनहाइयों का आलम,
कुछ तुम भी गुनगुनाओ,कुछ हम भी गुनगुनाएं!


ये दिलनशी नज़ारें,ये उलझे -उलझे गेंसू ,
कुछ तुम इन्हें सवारों ,कुछ हम इन्हें सुलझाएं


ये नज़ाकतभरी अदा से, शर्मा के लबों का खुलना,
दीवानगी कि हद से ,कहीं हम गुज़र न जायें!

Thursday, July 16, 2009

दस्तक

किसी के दिल पे अचानक जो दी दस्तक मैंने,
वो दिल घबरा के बोला की अभी वक्त नहीं,
अभी मेरे कदमो की राह में मुहब्बत कोई मंजिल नहीं,
अभी हमारा साथ कुछ लम्हों का है,हमकदम हो तुम हमदम नहीं,
अभी मुझमे वो जस्बात मुकम्मिल नहीं ,
अभी ज़माने की रस्मों का ज़रा ख़याल है हमें ,
अभी वो हौसले और वो खयालात नहीं,

मैंने कहा उससे की वो न घबराए ,
वो परेशां हो तो मुझको भी आराम नहीं,
कुछ पलों का साथ हमारा खुशगवार रहे ,
उसकी ज़िन्दगी में मेरा,बस एक ख्याल रहे,
और वो खायाल हो हँसी की जिसके आते ही,
उसके होंठ खिले और वो दिल से मुस्काए...

Tuesday, July 14, 2009

ज़िन्दगी


ज़िन्दगी तुझको इस तरह जिया है मैंने ,
कि हर लम्हा ये कहे कि वो लाज़िम है,
हर एक लम्हा ये कहे कि उसकी क़द्र हुई,
हर एक रात करे अपने गुज़रने का मलाल,
हर एक सुबह किसी मंज़िल का इंतज़ार करे !
ज़िन्दगी तुझको इस तरह जिया है मैंने.......
हर एक शक्श से सीखा गम ऐ हस्ती का सबक ,
हर एक शक्श को तड़पता हुआ सा पाया है,
हर एक शक्श की आंखों में पढ़ी है उम्मीद ,
हर एक शक्श से चाहा की ख़ुद से प्यार करे!

ज़िन्दगी तुझको इस तरह जिया है मैंने.....
हर एक शाम है गुज़री किसी की फुरकत में,
हर एक शबनम अगर गिरी तो मुस्कुराती हुई,
हर एक गम से हुई है,खुशी से बढ़ के मुहब्बत,
हर एक सूरत में तुझे प्यार दिया है मैंने....
ज़िन्दगी तुझको इस तरह जिया है मैंने.....

मन


मन जो कहता है ,बस वो कहता है !

कोई उन्मुक्त खड्ग हो जैसे,कोई इठलाती नदी हो जैसे,

कोई फूलों की महक हो जैसे,कोई लम्हों में सदी हो जैसे!

मन जो कहता है ,बस वो कहता है !

तुम्हारे मन में लगन रहती है,मुझसे मिलने की जलन रहती है,

किसी शबनम में छुपे शोले की तरह ,जस्बात ऐसे की हिंडोले की तरह,

पल में जीने की ललक हो जैसे ,पल में मरने की हो हसरत जैसे !

मन जो कहता है ,बस वो कहता है !

किसी बंधन में ये न बंधना चाहे ,किसी बचपन की हँसी हो जैसे ,

किसी रिश्ते का जो कुछ नाम न हो,उसकी करता है इबादत जैसे !

मन जो कहता है ,बस वो कहता है !

मन कहता है किसी के मन को पढ़ें,उसे सुने उसे समझें और कुछ लम्हा जियें,

उससे कह दें, जो उसने कहा नहीं,कर दें हैरान ऐसे की कोई जादू जैसे !

मन जो कहता है ,बस वो कहता है !

मन की सुनतें हैं,मन की करतें हैं ,मन में रहतें हैं,मन में रखतें हैं,

मन को खो कर मन को पाते हैं,कोई सौदा हो खरा खरा जैसे!

मन जो कहता है ,बस वो कहता है !

Monday, July 13, 2009

मुझको ऐसी गुड़िया देना







हमारी दुनिया में कोई आने वाली है..या...?बस मैं अपनी शरीक ऐ हयात से गुजारिश करता हूँ...









मुझको ऐसी गुड़िया देना !



फूलों सी कोमल ,तितली सी चंचल,खुशबू में चंदन ,आँखों में काजल !



मुझको ऐसी गुड़िया देना !



पैरों में पायल ,माथे पे बिंदिया ,तेरी और मेरी चुराए वो निंदिया!



मुझको ऐसी गुड़िया देना !



अक्ल में मुझसी,शक्ल में तुमसी,होठों में हँसी खुशियों में गुम सी !



मुझको ऐसी गुड़िया देना !



इठला के चलती ,तुतला के कहती ,घोड़ा और हाथी ,मुझको बनती!



मुझको ऐसी गुड़िया देना !



फल और सब्जी वो जम जम के खाए ,चौकलेट और मिठाई थम थम के खाए!



मुझको ऐसी गुड़िया देना !



विश्वास मेरी मुस्कान तेरी ,शक्ति की मूरत ,वो पहचान मेरी!



मुझको ऐसी गुड़िया देना !






Friday, July 10, 2009

खुशी

खुशी मिलती है ,बारिश की फुहारों से ,
मस्ती में नाचने से ,कुल्हड़ की चाय से,
सूरज के उगने से, फूलों के खिलने से,
सावन में नहाने से,दोस्तों के मिलने से,
जीवन में उठने से ,मंजिल के मिलने से ,
प्यार भरे उपहार से,मस्ती भरे त्यौहार से,
किसी के दिल में रहने से,बच्चे की पहली पुकार से,
किसी की मुस्कराहट से,आने वाले की आहट से,
पहली पहली चाहत से,प्यार भरे बस इक ख़त से,
मासूम सी इक बोली से,शाम कि ठिठोली से,
मीठी सी गोली से ,दुल्हन को इक डोली से,
मुश्किल से मिली एक फुर्सत से,मन में बसी एक मूरत से,
मस्जिद कि एक आज़ान से,मन्दिर में एक भगवान् से,
खुशी मिलती है, छोटी छोटी चीज़ों से ,
साथ रहने वाले अजीजों से.....

Tuesday, July 7, 2009

एक हम , एक आप


एक हम थे की पलकें बिछाये बैठे थे ,

एक आप थे की गुजरकर हमें देखा भी नहीं!

एक हम थे की फिर लिया तन्हा ही सफर का मजा,

एक आप थे की आपको कारवां ही मिल गया!

एक हम थे की आपकी खुशियों पे कुर्बान ,

एक आप थे की हमारी हँसी पे यकीं किया!

एक हम थे की हर एक लम्हा तुम्हे याद किया,

एक आप थे की अक्सर हमे भुला दिया!

एक हम थे की अक्सर मांगी दुआएं साथ रहने की ,

एक आप थे की दूरी में संभालना सीख लिया!

खैर ये ज़िन्दगी है ,हर खवाब पूरा हो नहीं सकता,

आप बस खुश रहें , हमने भी जीना सीख लिया!