न तुमसे है कोई वादा,न ही मंजिल की कोई सूरत,
फ़िर भी मेरी नज़र में ये इंतज़ार क्यूँ है।
ये तुम भी जानते हो ये हम भी जानते हैं,
कि राहें जुदा जुदा हैं ,पर इस दिल का क्या करूँ मैं,
जो मुझसे कह रहा है,कि तुम्हारा साथ होगा ,
इसे ये ऐतबार क्यूँ है !
मैं सोचता हूँ अक्सर, कि तुम सोचती हो कैसे ?
क्या तुम्हारी ज़िन्दगी में ,कभी लाज़िम रहूँगा मैं भी ?
हाँ ऐसा ज़रूर होगा ,इसे ये ऐतबार क्यूँ है!
ये पहली दफा हुआ है ,कि जलने लगा हूँ मैं भी,
कोई तुम्हारे साथ हो तो, ख़ुद से कहने लगा हूँ मैं भी,
ये कौन आ गया है, इसे ये इख्तियार क्यूँ है!
Sunday, May 24, 2009
Friday, May 22, 2009
इंतज़ार
वो गुम हैं कहीं खुद मे,
और हम गुम हैं उन्ही मे,
ऐसे आलम में भी दिल मे,
मोहब्बत गुनगुनाती है।
कभी रहतें हैं वो तनहा ,
कभी रहतें हैं हम तनहा,
इन तनहाइयों में भी ,
कोई आवाज़ आती है।
वो चांदनी की उदासी ,
ये इंतज़ार की रातें ,
इक लुफ्त है इनका ,
थोडी लज्ज़त सी आती है,
चंचल सी ये आँखें ,
ये मासूम सी बोली,
चले जब आप जाते हैं,
इन्ही की याद आती है।
वो दिख जन अचानक,
वो रूकती हुई नज़रें,
यूँ लगता है किस्मत ही ,
ख़ुद हमको मिलाती है।
वो गुम हैं कहीं खुद मे...
और हम गुम हैं उन्ही मे,
ऐसे आलम में भी दिल मे,
मोहब्बत गुनगुनाती है।
कभी रहतें हैं वो तनहा ,
कभी रहतें हैं हम तनहा,
इन तनहाइयों में भी ,
कोई आवाज़ आती है।
वो चांदनी की उदासी ,
ये इंतज़ार की रातें ,
इक लुफ्त है इनका ,
थोडी लज्ज़त सी आती है,
चंचल सी ये आँखें ,
ये मासूम सी बोली,
चले जब आप जाते हैं,
इन्ही की याद आती है।
वो दिख जन अचानक,
वो रूकती हुई नज़रें,
यूँ लगता है किस्मत ही ,
ख़ुद हमको मिलाती है।
वो गुम हैं कहीं खुद मे...
Thursday, May 21, 2009
ख्वाब
1-
सब जानते हैं मुश्किल है ताबीर ए ख्वाब ,
लेकिन गुजराती है जिंदगानी ख्वाबों के सहारे.
2-
सिर्फ ख्याल गर रहें तो ज़िन्दगी नहीं बनती ,
हवाओं में मेरे अज़ीज़ कभी तस्वीर नहीं बनती,
ख्वाबों की इसी जहाँ में तू ताबीर करना सीख,
तूफान से बिना लडे,कभी तकदीर नहीं बनती!
3-
नहीं है मेरा ख्वाब ताबीर ए महल का इस ज़मीं पर ,
मैंने तो किसी के दिल में बनाया है इक मकां.
सब जानते हैं मुश्किल है ताबीर ए ख्वाब ,
लेकिन गुजराती है जिंदगानी ख्वाबों के सहारे.
2-
सिर्फ ख्याल गर रहें तो ज़िन्दगी नहीं बनती ,
हवाओं में मेरे अज़ीज़ कभी तस्वीर नहीं बनती,
ख्वाबों की इसी जहाँ में तू ताबीर करना सीख,
तूफान से बिना लडे,कभी तकदीर नहीं बनती!
3-
नहीं है मेरा ख्वाब ताबीर ए महल का इस ज़मीं पर ,
मैंने तो किसी के दिल में बनाया है इक मकां.
Wednesday, May 20, 2009
मां
मां तुम वो दर्पण हो,
जिसमे मेरी तस्वीर कभी ओझल नहीं होती .
मां तुम वो आँगन हो,
जिसमे अतकेलियां करता था मेरा बचपन.
मां तुम वो आँचल हो,
जिसने मुझे दुनिया की बुराइयों से बचाया.
मां तुम वो सावन हो,
जिससे मेरे दिल को हमेशा ठंडक मिलती है.
मां तुम वो झरना हो,
जि़समे हमेशा प्यार का पानी बहता है.
मां तुम वो झील हो,
जिसके मीठे पानी में हर ग़म डूब जाता है.
मां तुम वो कारण हो,
जिसकी वजह से आज मैं वो हूँ, जो मैं हूँ.
मां तुम वो चेहरा हो,
जिसे याद करते ही दिल कहता है की तुम यहीं हो,
और कह रही हो, उदास मत हो मैं हूँ ना,
तेरी हर ख़ुशी में खुश और तेरे हर ग़म में शरीक ,
मैं हूँ ना,मैं हूँ ना.
जिसमे मेरी तस्वीर कभी ओझल नहीं होती .
मां तुम वो आँगन हो,
जिसमे अतकेलियां करता था मेरा बचपन.
मां तुम वो आँचल हो,
जिसने मुझे दुनिया की बुराइयों से बचाया.
मां तुम वो सावन हो,
जिससे मेरे दिल को हमेशा ठंडक मिलती है.
मां तुम वो झरना हो,
जि़समे हमेशा प्यार का पानी बहता है.
मां तुम वो झील हो,
जिसके मीठे पानी में हर ग़म डूब जाता है.
मां तुम वो कारण हो,
जिसकी वजह से आज मैं वो हूँ, जो मैं हूँ.
मां तुम वो चेहरा हो,
जिसे याद करते ही दिल कहता है की तुम यहीं हो,
और कह रही हो, उदास मत हो मैं हूँ ना,
तेरी हर ख़ुशी में खुश और तेरे हर ग़म में शरीक ,
मैं हूँ ना,मैं हूँ ना.
Subscribe to:
Posts (Atom)