वो गुम हैं कहीं खुद मे,
और हम गुम हैं उन्ही मे,
ऐसे आलम में भी दिल मे,
मोहब्बत गुनगुनाती है।
कभी रहतें हैं वो तनहा ,
कभी रहतें हैं हम तनहा,
इन तनहाइयों में भी ,
कोई आवाज़ आती है।
वो चांदनी की उदासी ,
ये इंतज़ार की रातें ,
इक लुफ्त है इनका ,
थोडी लज्ज़त सी आती है,
चंचल सी ये आँखें ,
ये मासूम सी बोली,
चले जब आप जाते हैं,
इन्ही की याद आती है।
वो दिख जन अचानक,
वो रूकती हुई नज़रें,
यूँ लगता है किस्मत ही ,
ख़ुद हमको मिलाती है।
वो गुम हैं कहीं खुद मे...
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1 comment:
it reminds me of our sweet old days...good that i got u forever..
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