Tuesday, February 16, 2016

यूँ ही कभी

काश तुम दिख जाओ अचानक से कभी यूँ ही कहीं
और खुश हो जाएँ दिल अपने फिर कभी यूँ ही कहीं
यूँ तो गुज़र रही है तसल्ली से ज़िन्दगी अपनी
पर करिश्मा कोई हो जाए कभी यूँ ही कहीं
वो जो हमदर्द हमनवां और हमराज़ है मेरा
है ख्याल में दिल में धडकनों में हमेशा लेकिन
वो हो जाय रूबरू भी कभी यूँ ही कहीं

Friday, January 1, 2016

यूँ ही कहीं

काश तुम दिख जाओ अचानक से कभी यूँ ही कहीं
और खुश हो जाएँ दिल अपने फिर कभी यूँ ही कहीं
यूँ तो गुज़र रही है तसल्ली से ज़िन्दगी अपनी
पर करिश्मा कोई हो जाए कभी यूँ ही कहीं
वो जो हमदर्द हमनवां और हमराज़ है मेरा
है ख्याल में दिल में धडकनों में हमेशा लेकिन
वो हो जाय रूबरू भी कभी यूँ ही कहीं

Saturday, November 29, 2014

अभी

अभी हौसलों की ज़रुरत है मुझको,
अभी ज़िन्दगी में मुकाम और भी हैं .

ये किसने कहा है सफ़र तय हुआ है,
सफ़र में ही रहना मुकद्दर है अपना,
सफ़र हो खूबसूरत बस इतना है करना,
हंसी की फुहारें,हो मस्ती का झरना,
मुझे इस सफर पे गुमान और भी हैं.

ऐसा नहीं है कि मुश्किल नहीं है,
मुशक्कत से हासिल हैं सबकी तकदीरें,
है हमने तो देखा बदलती हैं लकीरें,
हुनर अपने हाथों में तमाम और भी है.


हो फुर्सत की घड़ियाँ तो जी भर के जी लें,
हर लम्हें में सदियों की कहानी को बुन लें,
पर मसरूफ़ियत का कुछ आलम है ऐसा,
कि हर पल है लगता कुछ काम और भी हैं.

अभी हौसलों की ज़रुरत है मुझको,
अभी ज़िन्दगी में मुकाम और भी हैं .

Thursday, December 5, 2013

दर्द

किसी के दर्द का एहसास यहाँ कौन करे ,
मरने वालों के साथ रोज़ यहाँ कौन मरे I
ख़ुशी मिलती है जो तुझको किसी के मातम से ,
तो तू इन्सान नहीं, हैवानियत से तेरी कौन डरे II
खुदगर्जी ने जितनी आँखों में लायें है आंसू ,
उनकी दुआओं से तेरी ज़िन्दगी महरूम रहे I
असर होगा जिस दिन उनकी आहों में,
तेरी दौलत से तेरी हिफाज़त , भला कौन करे II


मेरा हौसला तो देखो ,मैं ये भी कर रहा हूँ,

खुद शोर में भी रह के, तेरी धड़कन को सुन रहा हूँ,

तुम कुछ पढ़ के गुनगुनाओ ,इसलिए तो लिख रहा हूँ,

दो चार लफ्ज़ लिख कर, तुम हौसला बढ़ाओ,

इसी उम्मीद में मैं तुमसे ये अशआर कह रहा हूँ..



वो पुछते हैं हमसे ,क्या मैं लब्ज़ों से खेलता हूँ,

मैं कहता हूँ ये उन्ही से,की क्या मजाल मेरी की मैं शब्दों में जान भर दूँ,

जीवन का कोरा कागज़ ,ग़म और ख़ुशी की स्याही ,

जो रंग देखता हूँ,वो रंग फेकता हूँ,

फिर ग़र उभर जो आयें, उनमे अच्छे हसीन चेहरे ,

कुछ शेर बन गए तो खुद को शायर सा देखता हूँ।




मुझे वो लफ्ज़ दे दे जो उसकी समझ में आये।

वरना तो मेरी बातें मेरे दिल की एक जुबां है।

कुछ और कह गया मैं कुछ और सुन गया वो। 

कभी मैंने मनाना चाहा तो और रो दिया वो।

वो मुझसे कुछ खफा है मैं उससे कुछ खफा हूँ

वो जो प्यार था हमारा वो हमसे कुछ खफा है।

वो उसकी उदास आँखे जब अक्सर देखता हूँ
वो जो अक्स था मेरा उनमें उसको ढूँढता हूँ।

दुनिया के फेरे जिसने संभल संभल के सीखे
मैं फिर एक बार उसी भोले से दिल को ढूँढता हूँ।

कल फिर छटेंगे बादल खुशियों की धुप होगी,

मेरी तुम्हारी बांतों की महफ़िल को ढूँढता हूँ..

हर एक बात जो कि बेहतर है ज़िन्दगी में मेरी

हर एक शक्श जो वजह है कामयाबी का मेरी

हर एक दोस्त जो समझतें हैं मुझे

हर एक लम्हा जो गुज़रता है मुस्कुराते हुए

हर एक शय जो आँखों को भा जाती है

उन सभी का दिल से शुक्रिया

ज़िन्दगी में मुश्किलें हैं और रहेंगी सदा

पर उसका भी शुक्रिया कि सबक दिया मुझे

हर एक रुकावट ने नयी सोच दी मुझे

मैं चलता हूँ और चलता रहूँगा 

किसी मंजिल पे पहुंचना मेरा मकसद नहीं रहा

पर सफ़र हो खूबसूरत यही तय किया मैंने।।



किसी मुकाम पे कोई कहाँ पहुँचता है, 

सफल है वो जो की सफर को ही मंजिल माने,

उठाये हर कदम अपना वो मुस्कुराते हुए,

किसी की मुस्कुराहट को ही अपनी ज़िन्दगी माने,

मंजिलें ख़त्म न होंगी,ना रास्ते कहीं ले जाएँगे तुझे ,

तू वही था ,वही है,वही रहेगा मगर,

तुझे बदलने वाले ,खुद ही बदल जाएँगे ..

ख़त्म हो जायेंगे जब तेरे सारे सवाल ,

तेरे अंतर में उजाले से नज़र आयेंगे,

उसी अग्नि में तुझे सुकून मिलेगा पगले ,

तेरे चारों तरफ बस फूल नज़र आयेंगे ..



Tuesday, February 5, 2013

शायर

वो पुछते हैं हमसे ,क्या मैं लब्ज़ों से खेलता हूँ,



मैं कहता हूँ ये उन्ही से,की क्या मजाल मेरी की मैं शब्दों में जान भर दूँ,


जीवन का कोरा कागज़ ,ग़म और ख़ुशी की स्याही ,


जो रंग देखता हूँ,वो रंग फेकता हूँ,


फिर ग़र उभर जो आयें, उनमे अच्छे हसीन चेहरे ,


कुछ शेर बन गए तो खुद को शायर सा देखता हूँ।


मुस्कराहट

मन तू क्यूँ उदास होता है, ऐसे क्यूँ अपना आपा खोता है,

भर ले बाँहों में सारी खुशियाँ तू, क्यूँ ग़मों से डर के धीरज खोता है,

देख क्या नेमतें हैं तेरे पास , कितना जीवन है तेरे आस पास,

कोई तुझको पुकारे मुस्का के, कोई तो जान तुझपे देता है,

डूब जा उनकी मुस्कराहट में, देख फिर चैन कितना मिलता है।

Thursday, January 17, 2013



किसी मुकाम पे कोई कहाँ पहुँचता है, 

 सफल है वो जो की सफर को ही मंजिल माने,

  उठाये हर कदम अपना वो मुस्कुराते हुए,

  किसी की मुस्कुराहट को ही अपनी ज़िन्दगी माने,

मंजिलें ख़त्म न होंगी,ना रास्ते कहीं ले जाएँगे तुझे ,

तू वही था ,वही है,वही रहेगा मगर,

तुझे बदलने वाले ,खुद ही बदल जाएँगे ..

ख़त्म हो जायेंगे जब तेरे सारे सवाल ,

तेरे अंतर में उजाले से नज़र आयेंगे,

उसी अग्नि में तुझे सुकून मिलेगा पगले ,
 
तेरे चारों तरफ बस फूल नज़र आयेंगे ..