Saturday, November 29, 2014

अभी

अभी हौसलों की ज़रुरत है मुझको,
अभी ज़िन्दगी में मुकाम और भी हैं .

ये किसने कहा है सफ़र तय हुआ है,
सफ़र में ही रहना मुकद्दर है अपना,
सफ़र हो खूबसूरत बस इतना है करना,
हंसी की फुहारें,हो मस्ती का झरना,
मुझे इस सफर पे गुमान और भी हैं.

ऐसा नहीं है कि मुश्किल नहीं है,
मुशक्कत से हासिल हैं सबकी तकदीरें,
है हमने तो देखा बदलती हैं लकीरें,
हुनर अपने हाथों में तमाम और भी है.


हो फुर्सत की घड़ियाँ तो जी भर के जी लें,
हर लम्हें में सदियों की कहानी को बुन लें,
पर मसरूफ़ियत का कुछ आलम है ऐसा,
कि हर पल है लगता कुछ काम और भी हैं.

अभी हौसलों की ज़रुरत है मुझको,
अभी ज़िन्दगी में मुकाम और भी हैं .

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