मन तू क्यूँ उदास होता है, ऐसे क्यूँ अपना आपा खोता है,
भर ले बाँहों में सारी खुशियाँ तू, क्यूँ ग़मों से डर के धीरज खोता है,
देख क्या नेमतें हैं तेरे पास , कितना जीवन है तेरे आस पास,
कोई तुझको पुकारे मुस्का के, कोई तो जान तुझपे देता है,
डूब जा उनकी मुस्कराहट में, देख फिर चैन कितना मिलता है।
भर ले बाँहों में सारी खुशियाँ तू, क्यूँ ग़मों से डर के धीरज खोता है,
देख क्या नेमतें हैं तेरे पास , कितना जीवन है तेरे आस पास,
कोई तुझको पुकारे मुस्का के, कोई तो जान तुझपे देता है,
डूब जा उनकी मुस्कराहट में, देख फिर चैन कितना मिलता है।
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