Tuesday, July 7, 2009

एक हम , एक आप


एक हम थे की पलकें बिछाये बैठे थे ,

एक आप थे की गुजरकर हमें देखा भी नहीं!

एक हम थे की फिर लिया तन्हा ही सफर का मजा,

एक आप थे की आपको कारवां ही मिल गया!

एक हम थे की आपकी खुशियों पे कुर्बान ,

एक आप थे की हमारी हँसी पे यकीं किया!

एक हम थे की हर एक लम्हा तुम्हे याद किया,

एक आप थे की अक्सर हमे भुला दिया!

एक हम थे की अक्सर मांगी दुआएं साथ रहने की ,

एक आप थे की दूरी में संभालना सीख लिया!

खैर ये ज़िन्दगी है ,हर खवाब पूरा हो नहीं सकता,

आप बस खुश रहें , हमने भी जीना सीख लिया!

5 comments:

Unknown said...

kya baat hai
bahut achha !

गोविंद गोयल, श्रीगंगानगर said...

sundar.narayan narayan

राजेंद्र माहेश्वरी said...

श्रेष्ठ स्मृतियों का बटन आपके हाथ में हो, तो जीवन आनन्दमय बन जाएगा।

शशांक शुक्ला said...

बहुत सुंदर रचना मैं कुछ और जोड़ता हूं

हम खड़े थे इंतज़ार में
मुस्कराते थे मन के इक विचार पे
वो आये मुस्कराये और
प्रेम पत्र थमा गये


अक्सर होता नहीं है पर मेरे विचार है आशावान विचार है

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।