
मन जो कहता है ,बस वो कहता है !
कोई उन्मुक्त खड्ग हो जैसे,कोई इठलाती नदी हो जैसे,
कोई फूलों की महक हो जैसे,कोई लम्हों में सदी हो जैसे!
मन जो कहता है ,बस वो कहता है !
तुम्हारे मन में लगन रहती है,मुझसे मिलने की जलन रहती है,
किसी शबनम में छुपे शोले की तरह ,जस्बात ऐसे की हिंडोले की तरह,
पल में जीने की ललक हो जैसे ,पल में मरने की हो हसरत जैसे !
मन जो कहता है ,बस वो कहता है !
किसी बंधन में ये न बंधना चाहे ,किसी बचपन की हँसी हो जैसे ,
किसी रिश्ते का जो कुछ नाम न हो,उसकी करता है इबादत जैसे !
मन जो कहता है ,बस वो कहता है !
मन कहता है किसी के मन को पढ़ें,उसे सुने उसे समझें और कुछ लम्हा जियें,
उससे कह दें, जो उसने कहा नहीं,कर दें हैरान ऐसे की कोई जादू जैसे !
मन जो कहता है ,बस वो कहता है !
मन की सुनतें हैं,मन की करतें हैं ,मन में रहतें हैं,मन में रखतें हैं,
मन को खो कर मन को पाते हैं,कोई सौदा हो खरा खरा जैसे!
मन जो कहता है ,बस वो कहता है !
4 comments:
kya kahen hum to fida hain aap pe aur aap ki kavitaon pe...
atisundar bhai lage raho......aapaki kwitaye pasand aati hai....sundar
Sir itne din tak aapne ye kavitaen kahan chupa kar rakhi thi....????
U hav the real poetic talent....
all the best....sir
bahut hi achcha.....
aapke khayalat ke kya kehne...
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