Thursday, July 16, 2009

दस्तक

किसी के दिल पे अचानक जो दी दस्तक मैंने,
वो दिल घबरा के बोला की अभी वक्त नहीं,
अभी मेरे कदमो की राह में मुहब्बत कोई मंजिल नहीं,
अभी हमारा साथ कुछ लम्हों का है,हमकदम हो तुम हमदम नहीं,
अभी मुझमे वो जस्बात मुकम्मिल नहीं ,
अभी ज़माने की रस्मों का ज़रा ख़याल है हमें ,
अभी वो हौसले और वो खयालात नहीं,

मैंने कहा उससे की वो न घबराए ,
वो परेशां हो तो मुझको भी आराम नहीं,
कुछ पलों का साथ हमारा खुशगवार रहे ,
उसकी ज़िन्दगी में मेरा,बस एक ख्याल रहे,
और वो खायाल हो हँसी की जिसके आते ही,
उसके होंठ खिले और वो दिल से मुस्काए...

1 comment:

Anonymous said...

Hey!!! I liked first stanza, it is very nice... when ever you are not prepared for any new shock & it comes suddenly it shakes you & you are not able to accept it. Take some times think about it & then go ahead.