
ज़िन्दगी तुझको इस तरह जिया है मैंने ,
कि हर लम्हा ये कहे कि वो लाज़िम है,
हर एक लम्हा ये कहे कि उसकी क़द्र हुई,
हर एक रात करे अपने गुज़रने का मलाल,
हर एक सुबह किसी मंज़िल का इंतज़ार करे !
कि हर लम्हा ये कहे कि वो लाज़िम है,
हर एक लम्हा ये कहे कि उसकी क़द्र हुई,
हर एक रात करे अपने गुज़रने का मलाल,
हर एक सुबह किसी मंज़िल का इंतज़ार करे !
ज़िन्दगी तुझको इस तरह जिया है मैंने.......
हर एक शक्श से सीखा गम ऐ हस्ती का सबक ,
हर एक शक्श को तड़पता हुआ सा पाया है,
हर एक शक्श की आंखों में पढ़ी है उम्मीद ,
हर एक शक्श से चाहा की ख़ुद से प्यार करे!
हर एक शक्श से सीखा गम ऐ हस्ती का सबक ,
हर एक शक्श को तड़पता हुआ सा पाया है,
हर एक शक्श की आंखों में पढ़ी है उम्मीद ,
हर एक शक्श से चाहा की ख़ुद से प्यार करे!
ज़िन्दगी तुझको इस तरह जिया है मैंने.....
हर एक शाम है गुज़री किसी की फुरकत में,
हर एक शबनम अगर गिरी तो मुस्कुराती हुई,
हर एक गम से हुई है,खुशी से बढ़ के मुहब्बत,
हर एक सूरत में तुझे प्यार दिया है मैंने....
ज़िन्दगी तुझको इस तरह जिया है मैंने.....
4 comments:
I must say 'A very good poet u are'.......
really nice poetry sir
abhi to zindagi ki shuruat hai dear..hope to see many more sweet moments with u for the whole life.
Bahoot badhiya, lajawab. maza aaya padhne me.
Bidaas poem !!!!
In true sense.... thit poem bear a resemblance to Life.
AEI ZINDAGI !!!!
GALE LAGA LE
HUMNE BHI TERE HAR GAM KO GALE SE LAGAYA HEI....
HAI NA ????
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