मां तुम वो दर्पण हो,
जिसमे मेरी तस्वीर कभी ओझल नहीं होती .
मां तुम वो आँगन हो,
जिसमे अतकेलियां करता था मेरा बचपन.
मां तुम वो आँचल हो,
जिसने मुझे दुनिया की बुराइयों से बचाया.
मां तुम वो सावन हो,
जिससे मेरे दिल को हमेशा ठंडक मिलती है.
मां तुम वो झरना हो,
जि़समे हमेशा प्यार का पानी बहता है.
मां तुम वो झील हो,
जिसके मीठे पानी में हर ग़म डूब जाता है.
मां तुम वो कारण हो,
जिसकी वजह से आज मैं वो हूँ, जो मैं हूँ.
मां तुम वो चेहरा हो,
जिसे याद करते ही दिल कहता है की तुम यहीं हो,
और कह रही हो, उदास मत हो मैं हूँ ना,
तेरी हर ख़ुशी में खुश और तेरे हर ग़म में शरीक ,
मैं हूँ ना,मैं हूँ ना.
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2 comments:
arrreeee improve your vocab bhai. its like a narration rather than poem. only sequencing is lined else masala is without punch.
better shot is expected
I think when Phupha Ji is promoting his blog, then i shall take his help too. Visit my blog - http://www.vertizzle.com/
And comment on the blog.
And yes, nice poems. You will do great.
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